UNGA 2025: रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत की स्वतंत्र नीति और गहरे भारत-रूस संबंधों की तारीफ की

सलोनी तिवारी: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) 2025 में वैश्विक राजनीति के बड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि भारत अपने फैसले खुद लेने में सक्षम है और किसी दबाव में आकर नीति नहीं बदलता। उन्होंने भारत और रूस के बीच दशकों से चले आ रहे गहरे संबंधों को भी रेखांकित किया।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था (Multipolar World Order) की ओर बढ़ रही है और भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के बल पर वैश्विक मंच पर नई पहचान बना रहा है।


भारत-रूस संबंध: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत और रूस (पहले सोवियत संघ) के रिश्ते कई दशकों पुराने हैं।

  • 1971 का इंडो-सोवियत शांति संधि समझौता दोनों देशों की साझेदारी की नींव था।

  • रूस ने भारत के रक्षा क्षेत्र, अंतरिक्ष अनुसंधान और परमाणु ऊर्जा में अहम योगदान दिया।

  • शीत युद्ध काल से लेकर आज तक रूस भारत का भरोसेमंद सहयोगी रहा है।


लावरोव का बयान क्यों महत्वपूर्ण है?

  1. स्वतंत्र विदेश नीति की पुष्टि
    लावरोव ने कहा कि भारत किसी भी दबाव में निर्णय नहीं लेता। चाहे वह अमेरिका का दबाव हो या यूरोप का। भारत हमेशा अपनी ज़रूरत और राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देता है।

  2. ग्लोबल साउथ का नेतृत्व
    भारत आज “Global South” का प्रतिनिधित्व कर रहा है। रूस मानता है कि भारत की आवाज़ विकासशील देशों की आवाज़ है।

  3. रणनीतिक साझेदारी
    भारत-रूस संबंध सिर्फ रक्षा और ऊर्जा तक सीमित नहीं हैं बल्कि कूटनीति और बहुपक्षीय मंचों पर भी दोनों देशों का सहयोग अहम है।


भारत की विदेश नीति: ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ का मॉडल

भारत की विदेश नीति का सबसे बड़ा आधार है –

  • गुटनिरपेक्षता की परंपरा

  • रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy)

  • बहु-संतुलन (Multi-Alignment)

भारत अमेरिका, रूस, यूरोप, मध्य एशिया और खाड़ी देशों के साथ समानांतर संबंध रखता है। यही वजह है कि लावरोव ने कहा – “भारत अपने फैसले खुद करता है।”


वर्तमान संदर्भ में भारत-रूस संबंध

1. रक्षा सहयोग

  • भारत की 60% से अधिक रक्षा ज़रूरतें रूस से पूरी होती हैं।

  • S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, ब्रह्मोस मिसाइल और न्यूक्लियर सबमरीन इसका उदाहरण हैं।

2. ऊर्जा साझेदारी

  • रूस से भारत को सस्ता कच्चा तेल मिल रहा है, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत दी है।

  • परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में भी रूस का अहम योगदान है।

3. अंतरिक्ष सहयोग

  • चंद्रयान और गगनयान मिशनों में रूस की तकनीकी सहायता रही है।

4. शिक्षा और सांस्कृतिक रिश्ते

  • हजारों भारतीय छात्र रूस में MBBS और टेक्नोलॉजी की पढ़ाई कर रहे हैं।

  • योग और बॉलीवुड ने रूस में भारतीय संस्कृति को लोकप्रिय बनाया है।


चुनौतियाँ भी मौजूद

  • भारत का अमेरिका और यूरोप से बढ़ता रिश्ता रूस के लिए चिंता का विषय है।

  • रूस-चीन संबंधों में मजबूती भारत की रणनीति को प्रभावित कर सकती है।

  • यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों ने भारत-रूस व्यापारिक सहयोग को जटिल बना दिया।


UNGA 2025 में भारत की भूमिका

  • भारत ने जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और वैश्विक शांति पर अपनी बात रखी।

  • “Vishwa Bandhutva” और “Vasudhaiva Kutumbakam” की भावना को सामने रखा।

  • रूस ने इन मूल्यों की सराहना की और भारत को वैश्विक संतुलन का ध्रुव बताया।


भविष्य का रोडमैप: भारत-रूस रिश्ते कहाँ तक जाएंगे?

  1. डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग – भारत में रक्षा उपकरणों का लोकल प्रोडक्शन।

  2. ऊर्जा – रूस से LNG और कच्चे तेल का दीर्घकालिक करार।

  3. टेक्नोलॉजी – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा में सहयोग।

  4. मल्टीपोलर वर्ल्ड – BRICS+, SCO और G20 जैसे मंचों पर संयुक्त पहल।


रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का यह बयान सिर्फ तारीफ नहीं बल्कि एक रणनीतिक संकेत भी है। भारत आज विश्व राजनीति का केंद्रीय खिलाड़ी बन चुका है। “भारत अपने फैसले खुद लेता है” – यह बात भारत की बढ़ती ताकत और आत्मनिर्भर कूटनीति को दर्शाती है।

भविष्य में भारत-रूस संबंध और गहरे होंगे, लेकिन भारत अपनी संतुलित विदेश नीति के जरिए सभी देशों के साथ सहयोग जारी रखेगा।

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