सलोनी तिवारी: हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्षभर में 24 एकादशी व्रत आते हैं, जिनमें प्रत्येक का अपना अलग धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। इन्हीं में से एक है पापांकुशा एकादशी, जिसे आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा और मोक्ष प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
इस दिन उपवास और पूजा करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मनुष्य को पुण्य की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में इस एकादशी का महत्व इतना अधिक बताया गया है कि इसे करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और भक्ति के मार्ग में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
Papankusha Ekadashi 2025 की तिथि और मुहूर्त
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एकादशी तिथि प्रारंभ: 2 अक्टूबर 2025, गुरुवार को सुबह 07:48 बजे
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एकादशी तिथि समाप्त: 3 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को प्रातः 04:11 बजे
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पारण का समय: 3 अक्टूबर 2025, प्रातः 06:16 बजे से 08:39 बजे तक
इसका अर्थ यह है कि पापांकुशा एकादशी का व्रत 2 अक्टूबर को रखा जाएगा और इसका पारण 3 अक्टूबर को किया जाएगा।
पापांकुशा एकादशी व्रत विधि
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प्रातःकाल स्नान – इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
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संकल्प लें – भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
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व्रत पालन – पूरे दिन उपवास करें। केवल फलाहार और जल ग्रहण कर सकते हैं।
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पूजन विधि –
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भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से शुद्ध करें।
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पीले वस्त्र पहनाएँ और पीले फूल चढ़ाएँ।
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धूप, दीप, नैवेद्य और तुलसी दल अर्पित करें।
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विष्णु सहस्रनाम या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
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भजन-कीर्तन – संध्या काल में भजन और विष्णु भगवान की कथा सुनें।
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रात्रि जागरण – यथाशक्ति रात्रि में भगवान विष्णु का नाम जप करते हुए जागरण करें।
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पारण – अगले दिन प्रातःकाल ब्राह्मण या गरीब को भोजन करवाकर पारण करें।
पौराणिक कथा (कहानी)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग में एक कुख्यात शिकारी अपने जीवन में पाप कर्मों से भरा हुआ था। एक समय जब उसका जीवन समाप्त होने के निकट आया तो महर्षि ने उसे पापांकुशा एकादशी व्रत करने का उपदेश दिया।
उसने नियमपूर्वक इस व्रत का पालन किया और मृत्यु के बाद उसे विष्णु लोक की प्राप्ति हुई।
इस कथा से यह स्पष्ट होता है कि चाहे मनुष्य ने अपने जीवन में कितने भी पाप किए हों, लेकिन यदि वह ईमानदारी और श्रद्धा से इस व्रत को करता है तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पापांकुशा एकादशी का महत्व
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इस व्रत से पापों का नाश होता है।
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व्यक्ति को मोक्ष और स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है।
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व्रती को भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है।
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इस दिन व्रत करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति आती है।
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इस व्रत का प्रभाव न केवल व्रती बल्कि उसके परिवार और पूर्वजों तक को मिलता है।
पापांकुशा एकादशी पर क्या करें और क्या न करें
क्या करें
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भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का उपयोग करें।
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व्रत कथा और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
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गरीब और जरूरतमंद को दान दें।
क्या न करें
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इस दिन मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन न करें।
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झूठ बोलने और क्रोध करने से बचें।
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किसी भी जीव-जंतु को कष्ट न पहुँचाएँ।
2025 में पापांकुशा एकादशी का वैश्विक महत्व
विदेशों में बसे भारतीय भी इस दिन व्रत रखकर और मंदिरों में जाकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और खाड़ी देशों में यह एकादशी विशेष रूप से ISKCON मंदिरों में बड़े धूमधाम से मनाई जाती है।
पापांकुशा एकादशी 2025 का व्रत 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा और पारण 3 अक्टूबर को होगा। यह दिन भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और पापों से मुक्ति का उत्तम अवसर है। श्रद्धापूर्वक उपवास और पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। अंशिका मीडिया किसी भी प्रकार की पुष्टि नहीं करता। किसी भी मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।


