सलोनी तिवारी: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने दिवाली से पहले एक बड़ा ऐलान किया है। प्रदेश के हर जिले में 10 से 18 अक्टूबर तक “स्वदेशी मेले” आयोजित किए जाएंगे। इस कदम का उद्देश्य MSME सेक्टर, स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों को समर्थन देना है।
स्वदेशी मेला क्यों महत्वपूर्ण?
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लोकल फॉर वोकल को बढ़ावा – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” मिशन से जुड़ा।
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MSME सेक्टर को सहारा – छोटे उद्योग और कारीगरों को सीधा फायदा।
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रोजगार के अवसर – मेले से युवाओं और महिलाओं को नए रोजगार के मौके।
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त्योहारी सीजन का लाभ – दिवाली शॉपिंग से बिक्री में तेजी।
मेले की खासियतें
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हर जिले में टेंट सिटी जैसी व्यवस्था।
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स्थानीय उत्पादों (हस्तशिल्प, कपड़े, ज्वेलरी, फूड प्रोडक्ट्स) की बिक्री।
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MSME यूनिट्स और कारीगरों को डिस्काउंटेड स्टॉल।
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कुल 75 जिलों में आयोजन।
MSME और व्यापारियों के लिए फायदे
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डायरेक्ट कस्टमर से कनेक्ट।
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ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ने का मौका।
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सरकारी योजनाओं की जानकारी।
दिवाली से पहले आर्थिक बढ़ावा
त्योहारी सीजन में आमतौर पर खरीदारी तेजी से बढ़ती है। ऐसे में स्वदेशी मेले न केवल MSME को बढ़ावा देंगे, बल्कि ग्राहकों को भी लोकल और सस्ते विकल्प उपलब्ध कराएंगे।
योगी सरकार का यह कदम स्थानीय व्यापार, आत्मनिर्भर भारत मिशन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला है। दिवाली के पहले आयोजित होने वाले ये मेले न केवल उत्सव की रौनक बढ़ाएंगे, बल्कि स्थानीय कारीगरों और MSME सेक्टर को भी नई पहचान देंगे।

