सलोनी तिवारी: मिग-21 की विदाई और तेजस का स्वागत
1. पृष्ठभूमि: मिग-21 का गौरवशाली इतिहास
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मिग-21 (MiG-21) को भारत में 1960 के दशक में वायुसेना में शामिल किया गया था।
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वर्षों से यह भारत की वायु सुरक्षा का एक अहम स्तंभ रहा।
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लेकिन उसे “फ्लाइंग कॉफिन” की उपाधि भी मिली है, क्योंकि इसकी उम्र, तकनीकी पुरानापन और दुर्घटनाएँ लोगों और विशेषज्ञों के बीच चिंता का विषय बनी रहीं।
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अगस्त 2025 में, वायुसेना प्रमुख ने मिग-21 की अंतिम उड़ानों को अंजाम दिया।
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अंतिम समारोह 26 सितंबर 2025 को चंडीगढ़ में नियत है, जिससे यह इकाई औपचारिक रूप से सेवा से बाहर हो जाएगी।
2. तेजस: भारत का स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान
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HAL Tejas भारत द्वारा विकसित हल्का मल्टीरोल फाइटर विमान है।
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वर्तमान में IAF ने Tejas Mark 1 व Mark 1A के संस्करण आदेश में रखे हैं।
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Tejas का डिजाइन तेज, हल्का और आधुनिक avionics, डिजिटल सिस्टम और बेहतर नियंत्रण प्रणालियों के साथ है।
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भारत की आत्मनिर्भरता (indigenization) की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है — तेजस में स्वदेशी सामग्री अनुपात (indigenous content) बढ़ रहा है।
3. मिग-21 और तेजस: तकनीकी तुलना
नीचे M ig-21 और Tejas के बीच प्रमुख तकनीकी अंतर दिए हैं:
| पहलू | मिग-21 (MiG-21 Bison / UPG प्रकार) | Tejas (Mk 1 / Mk 1A) |
|---|---|---|
| मूल देश | सोवियत / रूस पुराना डिजाइन | भारत (HAL / ADA) |
| इंजन / थ्रस्ट | टर्बोजन / afterburning jet, पुरानी तकनीक | आधुनिक afterburning turbofan, बेहतर ईंधन दक्षता |
| वज़न / पेलोड | हल्का विमान, पर सीमित पेलोड | अपेक्षाकृत अधिक पेलोड क्षमता |
| गति / छत | उच्च गति / ऊँची छत | अच्छे स्तर की गति और ऊंचाई, मगर मिग-21 की अधिकतम गति को नहीं पार कर पाती |
| सेंसर्स / Avionics | पुरानी रडार एवं उपकरण | मल्टीमोड रडार, डिजिटल नियंत्रण, आधुनिक नेविगेशन |
| हथियार लोडआउट | पारंपरिक मिसाइलें, बम, सीमित इंटरफ़ेस | आधुनिक एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड हथियार, बेहतर अनुकूलता |
| रख-रखाव / ऑपरेशनल खर्च | अधिक रखरखाव व संसाधन व्यय | डिज़ाइन में लॉजिस्टिक हल्कापन, कम ऑपरेशनल खर्च |
| स्वीकार्यता | पुराने, कई दुर्घटनाएँ, सीमित भविष्य | अपेक्षाकृत नए, विकासशील प्लेटफ़ॉर्म |
यह तुलना MilitaryFactory की तुलना तालिका पर आधारित है।
DNA India और अन्य स्रोतों ने भी तेजस की आधुनिक क्षमताओं को मिग-21 की तुलना में श्रेष्ठ माना है।
4. चुनौतियाँ और सीमाएँ
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पायलट प्रशिक्षण एवं ट्रांज़िशन: पुराने मिग-21 पायलटों को तेजस पर प्रशिक्षित करना कठिन है क्योंकि नया प्लेटफ़ॉर्म आधुनिक तकनीक से लैस है।
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संख्या और फ्लाइट घंटे की कमी: तेजस अभी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं है।
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रख-रखाव और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क: मिग-21 के दर्जनों वर्षों के अनुभव और इंफ्रास्ट्रक्चर रहे हैं, उन्हें बदलने में समय लगेगा।
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सप्लायर और आपूर्ति श्रृंखला: विदेशी कंपोनेंट्स की कमी, साझेदारों पर निर्भरता।
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रणनीतिक खामियाँ: तेजस की रेंज व एवियेशन सीमाएँ मिग-21 की तुलना में कम हो सकती हैं। (कुछ विश्लेषकों की राय)
5. भारतीय वायुसेना का भविष्य और रणनीति
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मिग-21 की सेवानिवृत्ति से वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या में कमी आएगी। वर्तमान में IAF की स्क्वाड्रन ताकत 31 है जबकि लक्ष्य 42 स्क्वाड्रन है।
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तेजस Mk 1A, Mk 2 और अन्य आधुनिक लड़ाकू विमानों की आपूर्ति से खाली स्थान भरा जाना है।
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भारत वर्तमान में 114 मल्टीरोल फाइटर विमानों की खरीद पर वैश्विक बोली आमंत्रित कर रहा है ताकि मॉडर्न फाइटर शामिल किए जा सकें।
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साथ ही, सपोर्ट सिस्टम जैसे AEW&C (एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम), mid-air refuellers, और अन्य सहायक विमानों को बढ़ाया जाना है।
6. भावनात्मक विदाई: मिग-21 को आखिरी सलामी
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वायुसेना प्रमुख Air Chief Marshal A.P. Singh ने मिग-21 से एकल उड़ान भरी और उसे भावनात्मक रूप से अंतिम विदाई दी।
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अंतः समारोह में सेना और पायलटों ने मिग-21 के योगदान को याद किया।
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19 सितंबर को चंडीगढ़ एयरबेस में औपचारिक सेवानिवृत्ति समारोह होगा।
7. निष्कर्ष
मिग-21 ने भारतीय वायुसेना को दशकों तक सेवा दी। उसकी विदाई भावनात्मक है, लेकिन समय की माँग और तकनीकी प्रवृत्तियों ने तेजस जैसे आधुनिक प्लेटफ़ॉर्म को रास्ता दिया है।
तेज़स, आधुनिक Avionics, बेहतर नियंत्रण प्रणालियाँ और स्वदेशी निर्माण क्षमता के साथ, मिग-21 की विरासत को आगे ले जाने का उपकरण बन सकता है।
भविष्य में, भारत की वायु श्रेष्ठता मजबूत होगी, बशर्ते नए विमानों की संख्या, सामर्थ्य और प्रशिक्षण निरंतर सुधारे जाएं।

