शारदीय नवरात्रि 2025: माँ शैलपुत्री पूजा विधि, घटस्थापना मुहूर्त, कथा और महत्व

सलोनी तिवारी: भारत त्योहारों की भूमि है। यहाँ हर उत्सव के पीछे आध्यात्मिकता, परंपरा और भक्ति की गहराई छिपी है। उन्हीं प्रमुख पर्वों में से एक है शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri)। यह पर्व वर्ष में दो बार—चैत्र (मार्च-अप्रैल) और शारदीय (सितंबर-अक्टूबर) में आता है।
2025 में शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 22 सितंबर (सोमवार) से हो रहा है। पहले दिन भक्तजन माँ शैलपुत्री (Maa Shailputri) की पूजा करते हैं और इसी दिन विधिवत घटस्थापना (Kalash Sthapana) भी होती है।


शारदीय नवरात्रि 2025 की तिथियाँ

  • प्रारंभ (Pratipada – Day 1): 22 सितंबर 2025

  • अष्टमी (Durga Ashtami): 29 सितंबर 2025

  • महानवमी (Mahanavami): 30 सितंबर 2025

  • विजयादशमी (Dussehra): 2 अक्टूबर 2025


घटस्थापना का शुभ मुहूर्त (Kalash Sthapana Muhurat 2025)

शास्त्रों में घटस्थापना को अत्यंत पवित्र माना गया है। यह देवी दुर्गा के आह्वान का प्रतीक है।

  • प्रातःकाल का मुहूर्त: 06:09 AM से 08:06 AM

  • अभिजीत मुहूर्त: 11:49 AM से 12:38 PM

नोट: घटस्थापना हमेशा प्रदोषकाल और अमृतसिद्धि योग में करना श्रेष्ठ माना गया है।


माँ शैलपुत्री कौन हैं? (Who is Maa Shailputri)

  • माँ शैलपुत्री नवरात्रि की प्रथम शक्ति हैं।

  • पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें “शैलपुत्री” कहा जाता है।

  • इनका वाहन नंदी (बैल) है और हाथों में त्रिशूल एवं कमल धारण करती हैं।

  • इनका स्वरूप अत्यंत सौम्य, पवित्र और तेजस्वी है।

  • इन्हें सती का पुनर्जन्म माना जाता है, जिन्होंने दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपने प्राण त्याग दिए थे।


माँ शैलपुत्री की पूजा विधि (Puja Vidhi of Maa Shailputri)

पूजा सामग्री

  • कलश (नारियल व आम के पत्तों सहित)

  • गंगाजल

  • सप्तधान्य (सात प्रकार के अनाज)

  • रोली, अक्षत, मौली

  • धूप, दीपक, घी, अगरबत्ती

  • पुष्प (सफेद विशेष रूप से शुभ)

  • फल व मिठाई (भोग हेतु)

  • लाल या सफेद वस्त्र

पूजा के चरण

  1. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को शुद्ध करें।

  2. चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर कलश स्थापित करें।

  3. कलश में गंगाजल भरकर उसमें सुपारी, सिक्के और सप्तधान्य डालें।

  4. नारियल पर मौली बाँधकर कलश पर रखें।

  5. माँ शैलपुत्री की प्रतिमा/चित्र को चौकी पर स्थापित करें।

  6. दीपक जलाएँ और पुष्प अर्पित करें।

  7. “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।

  8. भोग लगाकर आरती करें और परिवार सहित देवी का आशीर्वाद लें।


माँ शैलपुत्री के मंत्र (Mantras)

  • बीज मंत्र:
    ॐ एं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ शैलपुत्र्यै नमः॥

  • स्तोत्र मंत्र:
    वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥


माँ शैलपुत्री की कथा (Story of Maa Shailputri)

पौराणिक मान्यता के अनुसार, सती ने दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपने पति भगवान शिव का अपमान सहन न कर अग्निकुंड में आत्मदाह कर लिया। अगले जन्म में वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री बनीं और “शैलपुत्री” कहलाईं। यही सती बाद में पार्वती के रूप में पुनः शिव से विवाह कर “शिवानी” और “गौरी” बनीं।
इनकी उपासना से मनुष्य का जीवन साहस, धैर्य और आत्मविश्वास से भर जाता है।


पहले दिन का रंग (Navratri Day 1 Colour)

  • 2025 में पहले दिन का रंग सफेद है।

  • सफेद रंग पवित्रता, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।

  • भक्तजन इस दिन सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनकर पूजा करते हैं।


माँ शैलपुत्री की उपासना के लाभ (Benefits of Worship)

  1. मानसिक शांति और आत्मविश्वास की प्राप्ति।

  2. वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

  3. स्वास्थ्य लाभ एवं रोगों से मुक्ति।

  4. करियर और शिक्षा में स्थिरता व सफलता।

  5. आध्यात्मिक उन्नति और साधना में प्रगति।


शारदीय नवरात्रि और लोक परंपरा

  • देश के विभिन्न हिस्सों में नवरात्रि अलग-अलग ढंग से मनाई जाती है।

  • उत्तर भारत में रामलीला और दुर्गा पूजा पंडाल सजते हैं।

  • गुजरात में गरबा और डांडिया का आयोजन होता है।

  • बंगाल में इसे दुर्गा पूजा के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है।

  • महाराष्ट्र में “घटस्थापना” विशेष महत्व रखती है।


शास्त्रों में महत्व

  • मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, नवरात्रि की उपासना से समस्त पाप नष्ट होते हैं।

  • माँ शैलपुत्री की पूजा से साधक की मूलाधार चक्र शक्ति जागृत होती है।

  • यह साधक को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों जीवन में उन्नति देती है।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। अंशिका मीडिया किसी भी प्रकार की पुष्टि नहीं करता। किसी भी मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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