सलोनी तिवारी: नवरात्रि का पर्व भारत में विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व रखता है। साल में चार बार नवरात्रि आती है, लेकिन शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि का महत्व सबसे ज्यादा है। 2025 में नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू होकर 30 सितंबर तक मनाई जाएगी।
नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की आराधना करते हैं। इन दिनों व्रत, पूजा-अर्चना, भजन, कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है। दिलचस्प बात यह है कि भारत के हर राज्य में नवरात्रि मनाने का तरीका अलग है। यही इसकी खासियत है।
पश्चिम बंगाल: भव्य दुर्गा पूजा और सिंदूर खेला
पश्चिम बंगाल में नवरात्रि को दुर्गा पूजा कहा जाता है।
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भव्य पंडालों की सजावट, थीम-आधारित मूर्तियाँ और कला का अद्भुत संगम यहां देखने को मिलता है।
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अंतिम दिन महिलाएं सिंदूर खेला करती हैं। वे मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती हैं और एक-दूसरे को लगाकर सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
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धुनुची नृत्य (धूप की थाली लेकर नृत्य) भी बंगाल की दुर्गा पूजा की खास पहचान है।
गुजरात: गरबा और डांडिया की धूम
गुजरात की नवरात्रि पूरी दुनिया में मशहूर है।
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नौ रातों तक गरबा और डांडिया का आयोजन होता है।
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महिलाएं पारंपरिक चनिया-चोली और पुरुष केडिया पहनकर रातभर देवी की आराधना में नृत्य करते हैं।
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गरबा के घेरे में जलता हुआ दीया मां शक्ति की ऊर्जा का प्रतीक होता है।
उत्तर प्रदेश और बिहार: रामलीला और कुमारी पूजा
उत्तर प्रदेश और बिहार में नवरात्रि का महत्व रामलीला और दशहरा से जुड़ा है।
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कई जगहों पर नौ दिनों तक रामलीला का मंचन होता है।
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दशमी के दिन रावण दहन का आयोजन होता है, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।
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कुमारी पूजा भी यहां की एक परंपरा है, जिसमें छोटी बच्चियों को देवी का रूप मानकर पूजा जाता है।
ओडिशा: देवी चामुंडा की आराधना
ओडिशा में नवरात्रि के दौरान देवी को चामुंडा के रूप में पूजा जाता है।
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यहां की पूजा में तंत्र साधना और मंत्रों का विशेष महत्व है।
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दुर्गा पूजा की भव्यता यहां भी बंगाल जैसी देखने को मिलती है, लेकिन लोक परंपराओं में थोड़ी अलग झलक मिलती है।
कर्नाटक: मैसूर दशहरा
कर्नाटक का मैसूर दशहरा नवरात्रि का सबसे भव्य रूप है।
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यहां मैसूर पैलेस को रोशनी से सजाया जाता है।
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राजसी जुलूस, हाथियों की सवारी और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस पर्व को खास बनाते हैं।
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यह नवरात्रि शक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम है।
महाराष्ट्र: नवरात्रि और घटस्थापना
महाराष्ट्र में नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है।
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घरों में जौ बोए जाते हैं और अखंड ज्योति जलाई जाती है।
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गरबा और डांडिया की धूम यहां भी देखने को मिलती है।
दक्षिण भारत: गोलू उत्सव
तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कई हिस्सों में नवरात्रि को गोलू उत्सव कहा जाता है।
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घरों में देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं की मूर्तियों को सजाया जाता है।
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महिलाएं और बच्चे घर-घर जाकर भजन गाते हैं और उपहार बांटते हैं।
नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
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नवरात्रि आत्मशुद्धि, संयम और साधना का पर्व है।
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नौ दिनों तक उपवास करने से शरीर की शुद्धि होती है और मन में सकारात्मकता आती है।
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मां दुर्गा की पूजा से साहस, बल और आत्मविश्वास बढ़ता है।
नवरात्रि सिर्फ धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपरा और विविधता का उत्सव भी है। चाहे बंगाल का सिंदूर खेला हो, गुजरात का गरबा, उत्तर भारत की रामलीला या मैसूर दशहरा—हर राज्य की परंपरा मां दुर्गा की भक्ति और शक्ति का ही स्वरूप है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। अंशिका मीडिया किसी भी प्रकार की पुष्टि नहीं करता। किसी भी मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
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