सलोनी तिवारी: हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं की आराधना का विशेष महत्व है। हर दिन किसी न किसी देवता को समर्पित माना गया है। शुक्रवार का दिन माँ लक्ष्मी की पूजा-अर्चना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक लक्ष्मी जी का पूजन करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि, धन-धान्य की वृद्धि और जीवन में शांति आती है।
शुक्रवार का महत्व
शुक्रवार का संबंध ग्रहों में शुक्र से है, और शुक्र ग्रह को ऐश्वर्य, सौंदर्य और वैभव का कारक माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन लक्ष्मी जी की आराधना करने से जीवन में ऐश्वर्य और धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है। जिन घरों में आर्थिक तंगी रहती है या परिवार में कलह का वातावरण बना रहता है, वहाँ शुक्रवार की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
पूजा की विधि
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शुक्रवार को प्रातःकाल स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर माँ लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं।
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लाल या गुलाबी रंग के पुष्प चढ़ाएं और कमल का फूल अर्पित करना सबसे शुभ माना गया है।
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दूध, मिश्री और सफेद वस्त्र का दान करें।
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शुक्रवार को कन्याओं को भोजन कराना और उन्हें वस्त्र या उपहार देना माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करता है।
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विशेष रूप से श्रीसूक्त, लक्ष्मी स्तोत्र और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने से लक्ष्मी जी शीघ्र प्रसन्न होती हैं।
शुक्रवार की व्रत कथा और मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, एक समय एक गरीब महिला ने शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी का व्रत करना शुरू किया। उसने विधिपूर्वक पूजा की और सच्चे मन से आराधना की। कुछ ही दिनों में उसके घर में सुख-समृद्धि आने लगी और उसका जीवन बदल गया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि शुक्रवार का व्रत माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने और दरिद्रता दूर करने के लिए अत्यंत प्रभावी है।
शुक्रवार को क्या करें और क्या न करें
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इस दिन घर की साफ-सफाई विशेष रूप से करें क्योंकि माँ लक्ष्मी स्वच्छ घर में ही वास करती हैं।
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बिस्तर पर बैठकर भोजन न करें और न ही घर में झाड़ू उल्टी दिशा में रखें।
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शुक्रवार को काले कपड़े पहनने से बचें और माता को लाल या सफेद वस्त्र अर्पित करें।
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घर में वाद-विवाद और कलह से बचें, क्योंकि अशांति से लक्ष्मी जी नाराज हो जाती हैं।
लाभ
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व्यापार और नौकरी में उन्नति
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घर में धन-धान्य की वृद्धि
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कर्ज से मुक्ति
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पारिवारिक जीवन में खुशहाली
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मन की शांति और आत्मिक संतोष
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। अंशिका मीडिया किसी भी प्रकार की पुष्टि नहीं करता। किसी भी मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

