सलोनी तिवारी: उत्तर प्रदेश सरकार ने मातृत्व स्वास्थ्य को मजबूत बनाने के लिए एक नया कदम उठाया है। राज्य में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी) की गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए “Addressing Maternal Anaemia in Uttar Pradesh” नामक एक विशेष हैंडबुक लॉन्च की गई है।
हैंडबुक का उद्देश्य
इस हैंडबुक का मकसद स्वास्थ्य केंद्रों, आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम (सहायक नर्सिंग मिडवाइफ) को व्यावहारिक उपायों और बेहतर दिशानिर्देशों से सशक्त करना है ताकि वे गर्भवती महिलाओं को सही समय पर परामर्श, जांच और उपचार उपलब्ध करा सकें।
एनीमिया की समस्या क्यों गंभीर?
भारत में, विशेषकर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में, एनीमिया गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती है। एनीमिया के कारण:
-
समय से पहले प्रसव का खतरा बढ़ जाता है।
-
शिशु का वजन कम हो सकता है।
-
मातृ मृत्यु दर का खतरा बढ़ता है।
हैंडबुक से मिलने वाले फायदे
-
आयरन और फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन को बढ़ावा।
-
पोषण शिक्षा और संतुलित आहार पर जोर।
-
समय पर ब्लड टेस्ट और मॉनिटरिंग।
-
ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाना।
योजना
सरकार का लक्ष्य है कि 2027 तक गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की दर में उल्लेखनीय कमी लाकर मातृ स्वास्थ्य को मजबूत बनाया जाए। इस पहल से न केवल मातृ मृत्यु दर घटेगी बल्कि नवजात शिशुओं का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।

