सलोनी तिवारी: भारत में सोना और चांदी न केवल निवेश का साधन हैं, बल्कि इन्हें परंपरा और संस्कृति से भी गहराई से जोड़ा जाता है। शादी-ब्याह, त्यौहार और धार्मिक अवसरों पर गहनों की खरीदारी आम बात है। लेकिन इनकी कीमत पर टैक्स और GST का सीधा असर पड़ता है।
हाल ही में सरकार ने सोना-चांदी पर 3% टैक्स और ज्वेलरी मेकिंग चार्ज पर 5% GST लागू किया है। आइए जानते हैं यह बदलाव ग्राहकों और कारोबारियों के लिए क्या मायने रखता है।
सोना और चांदी पर 3% टैक्स
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सरकार ने सोना और चांदी की खरीद पर 3% टैक्स निर्धारित किया है।
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यानी यदि आप ₹1,00,000 का सोना खरीदते हैं, तो उस पर ₹3,000 टैक्स देना होगा।
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यह नियम निवेशकों और आम खरीदारों दोनों पर समान रूप से लागू है।
ज्वेलरी मेकिंग चार्ज पर 5% GST
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जब आप सोने या चांदी को गहनों में ढलवाते हैं, तो उस पर मेकिंग चार्ज जुड़ता है।
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इस मेकिंग चार्ज पर अब 5% GST लगेगा।
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उदाहरण: यदि मेकिंग चार्ज ₹10,000 है, तो उस पर ₹500 GST देना होगा।
ग्राहक पर असर
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गहनों की कुल कीमत बढ़ेगी – टैक्स और GST दोनों जुड़ने से जेवर पहले की तुलना में महंगे पड़ेंगे।
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नकली बिल से बचाव – सरकार का मानना है कि इससे गहनों की खरीद पारदर्शी होगी और नकली बिलिंग कम होगी।
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सही इनवॉइस जरूरी – अब ग्राहक को खरीदते समय पूरा टैक्स और GST इनवॉइस में दर्ज मिलेगा।
ज्वेलर्स पर असर
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कारोबारियों को अपने टैक्स सिस्टम को अपडेट करना होगा।
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पारदर्शिता बढ़ेगी, जिससे बाजार में विश्वास कायम होगा।
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हालांकि छोटे ज्वेलर्स को टैक्स कम्प्लायंस की वजह से थोड़ी परेशानी हो सकती है।
निवेशकों पर असर
सोना और चांदी लंबे समय से सुरक्षित निवेश माने जाते हैं।
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टैक्स और GST के बावजूद, इनकी डिमांड में ज्यादा कमी आने की संभावना नहीं है।
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निवेशकों को बस अपने बजट में टैक्स का अतिरिक्त हिसाब लगाना होगा।
किन बातों का रखें ध्यान?
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गहने खरीदते समय हमेशा पंजीकृत ज्वेलर से ही खरीदें।
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बिल में 3% टैक्स और 5% GST का स्पष्ट उल्लेख हो।
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बिना इनवॉइस के गहने खरीदने से बचें।
सरकार द्वारा सोना-चांदी पर 3% टैक्स और ज्वेलरी मेकिंग चार्ज पर 5% GST तय करने से गहनों की कीमत जरूर बढ़ेगी, लेकिन इससे बाजार में पारदर्शिता आएगी। खरीदारों को अब सावधानी से बिल देखकर ही निवेश करना चाहिए।

