सलोनी तिवारी: काठमांडू: नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ युवा पीढ़ी का गुस्सा फूट पड़ा है। सोमवार को हजारों प्रदर्शनकारी काठमांडू की सड़कों पर उतर आए और न्यू बानेश्वर स्थित संघीय संसद की ओर कूच कर गए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड्स तोड़कर संसद भवन में घुसने की कोशिश की। हालात बेकाबू होने पर पुलिस ने आंसू गैस, पानी की बौछार और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया। झड़पों में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है और 250 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, आंदोलन को “जेन-जी (Gen Z) प्रोटेस्ट” नाम दिया गया है। शुरुआत में प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण मार्च कर रहे थे, लेकिन पुलिस कार्रवाई के बाद हालात बिगड़ गए। इसके बाद प्रशासन ने न्यू बानेश्वर इलाके में दोपहर 12:30 बजे से रात 10 बजे तक कर्फ्यू लगा दिया और सेना की तैनाती भी कर दी। राजधानी में बढ़ते बवाल और तोड़फोड़ को देखते हुए सरकार ने तोड़फोड़ करने वालों को देखते ही गोली मारने के आदेश जारी कर दिए।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार ने फेसबुक, व्हाट्सएप और एक्स (ट्विटर) समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाकर भ्रष्टाचार को छिपाने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने की कोशिश की है। प्रदर्शन सिर्फ काठमांडू तक सीमित नहीं रहा बल्कि पोखरा, विराटनगर, बुटवल और झापा जिले के दमक तक फैल गया। दमक में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का पुतला फूंका और नगरपालिका कार्यालय पर धावा बोलने की कोशिश की।

