सलोनी तिवारी: शिक्षा को अक्सर “जीवन का प्रकाश” कहा जाता है। यह केवल अक्षरों और शब्दों को समझने की क्षमता ही नहीं है, बल्कि यह सोचने, समझने और सही निर्णय लेने की शक्ति भी देती है। इसी महत्व को रेखांकित करने के लिए हर साल 8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (International Literacy Day) मनाया जाता है।
इस दिन का उद्देश्य लोगों को यह जागरूक करना है कि शिक्षा हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है, और बिना शिक्षा के न तो समाज आगे बढ़ सकता है और न ही देश।
इतिहास
-
1965 में ईरान की राजधानी तेहरान में आयोजित शिक्षा मंत्रियों के विश्व सम्मेलन में साक्षरता को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा गया।
-
इसके बाद यूनेस्को (UNESCO) ने 1966 में आधिकारिक रूप से हर साल 8 सितंबर को “अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस” घोषित किया।
-
पहली बार यह दिवस 8 सितंबर 1967 को मनाया गया।
यूनेस्को का मानना था कि शिक्षा न केवल व्यक्तिगत विकास का साधन है, बल्कि यह सामाजिक असमानता, गरीबी और पिछड़ेपन को भी मिटा सकती है।
उद्देश्य
-
दुनियाभर से अशिक्षा समाप्त करना।
-
सभी वर्गों—विशेषकर महिलाओं और वंचित समुदायों—को शिक्षा से जोड़ना।
-
शिक्षा के जरिए समान अवसर और सशक्तिकरण सुनिश्चित करना।
-
डिजिटल युग में शिक्षा को नई तकनीक के साथ जोड़ना।
-
लोगों को यह याद दिलाना कि शिक्षा एक जीवनभर की प्रक्रिया है।
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2025 की थीम
हर साल इस दिवस की एक विशेष थीम तय होती है।
2025 की थीम (उदाहरण):
“सभी के लिए डिजिटल शिक्षा और जीवनभर सीखने का अधिकार”
इसका मकसद है कि तकनीक और इंटरनेट की मदद से शिक्षा को हर घर, हर गाँव और हर वर्ग तक पहुँचाया जाए।
विश्व में साक्षरता की स्थिति
यूनेस्को की हालिया रिपोर्ट के अनुसार—
-
दुनियाभर में लगभग 76 करोड़ लोग आज भी पढ़ने-लिखने में सक्षम नहीं हैं।
-
इनमें से दो-तिहाई महिलाएँ हैं।
-
अफ्रीका और दक्षिण एशिया अशिक्षा से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र हैं।
भारत में साक्षरता
भारत ने पिछले दशकों में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
-
1951 में: केवल 18% लोग साक्षर थे।
-
2021 में: यह दर बढ़कर लगभग 77% हो गई।
-
केरल देश का सबसे साक्षर राज्य है, जहाँ 95% से अधिक लोग पढ़े-लिखे हैं।
-
बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में अभी भी साक्षरता दर अपेक्षाकृत कम है।
भारत सरकार “सर्व शिक्षा अभियान”, “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ”, “डिजिटल इंडिया” जैसे कार्यक्रम चला रही है ताकि हर बच्चा और वयस्क शिक्षा से जुड़ सके।
शिक्षा का महत्व
-
व्यक्तिगत विकास: शिक्षा से आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
-
रोजगार के अवसर: पढ़े-लिखे व्यक्ति को बेहतर नौकरी और जीवन स्तर मिलता है।
-
समानता और सशक्तिकरण: महिलाओं और कमजोर वर्गों को समाज में सम्मान और अधिकार मिलते हैं।
-
लोकतंत्र की मजबूती: शिक्षित समाज लोकतांत्रिक मूल्यों को समझता है और सही चुनाव कर सकता है।
-
आर्थिक विकास: साक्षरता GDP और रोजगार दर को बढ़ाती है।
चुनौतियाँ
-
ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी शिक्षा की पहुँच कम है।
-
आर्थिक कारणों से बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं।
-
लड़कियों की शिक्षा को लेकर कई जगह सामाजिक रुकावटें हैं।
-
डिजिटल शिक्षा में “डिजिटल डिवाइड” (इंटरनेट और उपकरणों की कमी) एक बड़ी चुनौती है।
आगे का रास्ता
-
डिजिटल क्लासरूम और ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देना।
-
सभी के लिए मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना।
-
महिला साक्षरता पर विशेष ध्यान देना।
-
कौशल आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करना।
-
सरकार, समाज और निजी संस्थाओं के सामूहिक प्रयासों से शिक्षा को व्यापक बनाना।
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2025 हमें याद दिलाता है कि शिक्षा केवल एक सुविधा नहीं बल्कि जीवन का अधिकार है। यह गरीबी मिटाने, समानता लाने और दुनिया को बेहतर बनाने का सबसे सशक्त साधन है।
एक शिक्षित व्यक्ति केवल खुद को नहीं, बल्कि पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों को भी रोशन करता है।

