सलोनी तिवारी: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और बदलते वित्तीय माहौल को देखते हुए विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) की रणनीति में अहम बदलाव किया है। अब RBI ने अमेरिकी ट्रेजरी बिल्स (US Treasury Bills) में निवेश की हिस्सेदारी घटाकर सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने का फैसला लिया है। यह कदम भारत की दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा और “गोल्डन हेज” नीति को मजबूत करने की दिशा में बड़ा निर्णय माना जा रहा है।
क्या है RBI का नया कदम?
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RBI ने अमेरिकी ट्रेजरी बिल्स में अपना निवेश घटाया है।
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सोने की हिस्सेदारी को बढ़ाया गया है, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार अधिक स्थिर और सुरक्षित रहे।
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यह कदम डॉलर पर निर्भरता घटाने और बहु-आयामी Forex Strategy बनाने के प्रयास का हिस्सा है।
सोने पर भरोसा क्यों बढ़ा?
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गोल्ड एक सुरक्षित संपत्ति – आर्थिक अनिश्चितता, युद्ध, भू-राजनीतिक संकट और महंगाई की स्थिति में सोने को सबसे सुरक्षित संपत्ति माना जाता है।
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डॉलर पर निर्भरता घटाना – दुनिया भर में डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
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गोल्ड रिजर्व = मुद्रा स्थिरता – सोने का बड़ा भंडार होने से भारतीय रुपया (INR) को स्थिरता मिलती है और निवेशकों का विश्वास मजबूत होता है।
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वैश्विक ट्रेंड – चीन, रूस सहित कई देशों ने भी हाल के वर्षों में सोने के भंडार में वृद्धि की है।
विदेशी मुद्रा भंडार और भारत की स्थिति
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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 650 बिलियन डॉलर से ज्यादा है।
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इसमें डॉलर, यूरो, पाउंड, येन और सोना शामिल है।
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RBI का यह कदम भारत को संभावित US Tariffs, Oil Price Volatility और Global Inflation जैसी चुनौतियों से बचाने में मदद करेगा।
इस फैसले का असर
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निवेशकों में विश्वास: सोने पर भरोसा बढ़ने से विदेशी और घरेलू निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा।
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रुपये की स्थिरता: वैश्विक झटकों के बावजूद रुपये पर दबाव कम होगा।
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दीर्घकालिक सुरक्षा: आने वाले वर्षों में भारत की वित्तीय प्रणाली और Forex Policy ज्यादा सुरक्षित बनेगी।
विशेषज्ञों की राय
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अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI का यह कदम “प्रो-एक्टिव रिस्क मैनेजमेंट” है।
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सोने की बढ़ी हुई हिस्सेदारी भारत को डॉलर की मजबूती और अमेरिकी नीतियों के प्रभाव से बचाने में मदद करेगी।
RBI का अमेरिकी ट्रेजरी बिल्स से दूरी बनाना और सोने को प्राथमिकता देना भारत की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित और स्थिर बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। यह निर्णय आने वाले वर्षों में भारतीय रुपया और Forex Reserve को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।

