सलोनी तिवारी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी जापान यात्रा समाप्त करने के बाद जब चीन के तियानजिन शहर पहुँचे तो वहाँ का नज़ारा भारत-चीन रिश्तों की नई झलक पेश कर रहा था। भारतीय समुदाय ने पीएम मोदी का बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया। एयरपोर्ट से लेकर सांस्कृतिक केंद्र तक, हर जगह उत्साह का माहौल था।
भारतीय समुदाय का स्वागत
तियानजिन में बसे भारतीय समुदाय ने पीएम मोदी का खुले दिल से अभिनंदन किया। भारतीय परिवारों, छात्रों और पेशेवरों ने फूलों, नारों और झंडों के साथ उनका स्वागत किया। इस दौरान पीएम मोदी बच्चों से लाड़-प्यार करते हुए दिखाई दिए। उन्होंने भारतीय प्रवासियों से बातचीत की और कहा कि “विदेश में रहकर भी आपकी भारतीयता और संस्कृति हमारी सबसे बड़ी ताकत है।”

सांस्कृतिक प्रस्तुति ने बांधा समां
पीएम मोदी के सम्मान में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ने भारत की समृद्ध धरोहर को चीन की धरती पर जीवंत कर दिया।
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ओडिशा का पारंपरिक ओडिसी नृत्य और
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उत्तर भारत की पहचान कथक नृत्य
ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने न केवल भारतीय संस्कृति का सौंदर्य दिखाया, बल्कि भारत और चीन के बीच दोस्ती और संवाद का पुल भी बनाया। यह आयोजन केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान नहीं, बल्कि कूटनीतिक रिश्तों को मजबूत करने का प्रतीक भी था।
शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बैठक
भारतीय समुदाय से मिलने और सांस्कृतिक कार्यक्रम का हिस्सा बनने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। यह मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित हुई।
बैठक के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा:
“दुनिया परिवर्तन की ओर बढ़ रही है। चीन और भारत दो सबसे प्राचीन सभ्यताएं हैं। हम दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश हैं और ग्लोबल साउथ का हिस्सा हैं। ऐसे में हमारा मित्र होना, अच्छे पड़ोसी बनना और ‘ड्रैगन व हाथी’ का साथ आना बेहद जरूरी है।”
मोदी और शी जिनपिंग की यह बैठक क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति में बेहद अहम मानी जा रही है।
कूटनीतिक महत्व
यह दौरा सिर्फ भारत-चीन संबंधों का प्रतीक नहीं है, बल्कि एक व्यापक संदेश भी देता है कि एशिया की दो बड़ी शक्तियाँ वैश्विक मंच पर सहयोग की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।
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भारतीय प्रवासियों से जुड़ाव मोदी के “भारत जोड़ो विदेश” दृष्टिकोण को दर्शाता है।
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सांस्कृतिक प्रस्तुति यह दिखाती है कि भारत “सॉफ्ट पावर” के जरिए भी रिश्तों को मजबूत करना चाहता है।
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शी जिनपिंग से मुलाकात सामरिक, आर्थिक और क्षेत्रीय साझेदारी का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

