सलोनी तिवारी: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का 2025 का शिखर सम्मेलन चीन के तियानजिन शहर में आयोजित किया गया, जिसमें भारत की भागीदारी और उसकी कूटनीतिक सक्रियता मुख्य आकर्षण रहे।
1. भारत-चीन रिश्तों में सकारात्मक बदलाव
प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात में दोनों नेताओं ने “भागीदार, प्रतिद्वंद्वी नहीं” को स्वीकार कर द्विपक्षीय संबंधों को एक नए मोड़ पर स्थापित करने पर जोर दिया। यह मोदी का चीन का पहला दौरा था और इसमें बॉर्डर तनाव कम करने और सांस्कृतिक व आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने की उम्मीद जताई गई।
2. आतंकवाद पर एकराय का आह्वान
मोदी ने SCO को “सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर” का मंच बताया और आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरी मानसिकता का साफ़ विरोध किया। उन्होंने पाकिस्तान परिदृश्य को मूर्त रूप देते हुए पाहलगाम हमले को केवल भारत में नहीं, बल्कि मानवता पर हमला बताया।
3. भारत-रूस सहयोग का पुनः इज़हार
पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात करते हुए कहा कि भारत और रूस ने सदा कठिन समय में साथ खड़ा होना जारी रखा है। इस संबंध में भारत-रूस साझेदारी को “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त” करार दिया, साथ ही पुतिन का भारत आने के निमंत्रण का उल्लेख किया, जो दिसंबर में वार्षिक शिखर सम्मेलन के अवसर पर होगा।
4.सम्मेलन SCO के विस्तार और संसद कार्ड को साकार करने की दिशा में
SCO ने विस्तार जारी रखने का रास्ता पकड़ा है—स्वितार वेविका (सूचना) और आर्थिक सुधार हेतु विकास बैंक की रूपरेखा बने की दिशा में कदम उठाए गए।
5. वैश्विक राजनीतिक संदेश
व्लादिमीर पुतिन ने साझा मंच से NATO की विस्तारवादी नीति पर बात की, जिसे उन्होंने यूक्रेन युद्ध की जड़ बताया और भारत-चीन की शांति प्रयासों की सराहना की।
6. NATO विस्तार पर पुतिन ने शांति हेतु चिंता जताई
शी जिनपिंग और मोदी से वार्तालाप के बाद पुतिन ने कहा कि NATO का पूर्व की ओर विस्तार यूक्रेन में स्थायी शांति के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने अपनी अलास्का यात्रा की चर्चाएँ साझा कीं।
7. SCO में वैश्विक दक्षिण एकता का प्रदर्शन
इस शिखर सम्मेलन में भारत, चीन, रूस समेत 20+ देशों के नेतागण शामिल हुए—एक वैश्विक दक्षिण एकता का प्रदर्शनी जैसा माहौल बना। मॉडलों में व्यापार, ऊर्जा, AI और साइबर सुरक्षा व सहयोग पर बल था

