अमेरिकी अपीलीय अदालत ने ट्रम्प के टैरिफ को गैरकानूनी घोषित किया, सुप्रीम कोर्ट में होगी अगली लड़ाई

सलोनी तिवारी: वाशिंगटन: अमेरिकी राजनीति और अर्थव्यवस्था में हलचल मचाते हुए, यू.एस. कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए अधिकांश ग्लोबल टैरिफ को गैरकानूनी घोषित किया। अदालत का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियाँ अधिनियम (IEEPA) राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता।

अदालत का फैसला 7-4 के बहुमत से आया और इसमें कहा गया कि टैरिफ लगाने की शक्ति केवल कांग्रेस के पास है। हालांकि, कोर्ट ने इन टैरिफ को 14 अक्टूबर 2025 तक लागू रहने की अनुमति दी है ताकि ट्रम्प प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अवसर मिल सके।


क्यों गैरकानूनी घोषित हुए टैरिफ?

  • अदालत ने माना कि IEEPA केवल आपात स्थितियों में संपत्ति जब्त करने या लेन-देन रोकने की अनुमति देता है।

  • लेकिन कर और टैरिफ लगाना राष्ट्रपति की शक्तियों के अंतर्गत नहीं आता।

  • कोर्ट ने “मेजर क्वेश्चन डॉक्ट्रिन” का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि इतनी बड़ी आर्थिक नीति के लिए कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य है।


कौन-कौन से टैरिफ प्रभावित हुए?

  • कनाडा, चीन और मैक्सिको पर लगाए गए कई ग्लोबल टैरिफ खारिज कर दिए गए।

  • स्टील, एल्यूमिनियम और ऑटोमोबाइल से जुड़े टैरिफ इस फैसले से अप्रभावित हैं, क्योंकि वे अलग कानूनों के तहत लागू हुए थे।


ट्रम्प की प्रतिक्रिया

राष्ट्रपति ट्रम्प ने अदालत के आदेश को “पूर्ण विनाश” बताते हुए खारिज किया और कहा कि उनके टैरिफ आगे भी लागू रहेंगे। प्रशासन अब मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाएगा।


असर और आगे का रास्ता

  • यह फैसला ट्रम्प की आर्थिक और व्यापार नीतियों के लिए बड़ा झटका है।

  • अमेरिकी निर्यातक और व्यापारिक समूहों ने राहत की सांस ली है।

  • अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है, जो राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों की सीमा को परिभाषित करेगा।

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