सलोनी तिवारी: नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की को भारत आने का औपचारिक आमंत्रण दिया है। यह आमंत्रण फिजी दौरे और आगामी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से पहले भारत की कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
यूक्रेन के राजदूत ने शनिवार को बताया कि यात्रा की तारीख पर दोनों देशों के बीच चर्चा जारी है और जल्द ही अंतिम रूप से तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध में तटस्थ रहने के बजाय “निष्पक्ष लेकिन सक्रिय भूमिका” निभाई है, जिसे यूक्रेन सकारात्मक दृष्टि से देखता है।
क्यों अहम है यह दौरा?
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भारत-यूक्रेन संबंधों में नई शुरुआत – लंबे समय से दोनों देशों के बीच व्यापारिक और रक्षा सहयोग सीमित दायरे में था। यह यात्रा उस सहयोग को और विस्तार दे सकती है।
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रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत की भूमिका – भारत लगातार युद्धविराम और शांति वार्ता पर जोर देता रहा है। इस आमंत्रण को भारत की “संतुलित कूटनीति” का हिस्सा माना जा रहा है।
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SCO और ग्लोबल मंच – ज़ेलेंस्की की भारत यात्रा, SCO जैसे मंचों पर भारत की सक्रियता को भी मज़बूत करेगी।
राजनयिक संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह यात्रा जल्द होती है, तो यह रूस और पश्चिमी देशों दोनों को संदेश देगा कि भारत ‘वैश्विक शक्ति संतुलन’ में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।

