सलोनी तिवारी: कानपुर, 22 अगस्त 2025: उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने 2025 ग्रामीण पर्यटन कन्क्लेव में एक महत्वाकांक्षी रणनीति प्रस्तुत की है, जिसका उद्देश्य राज्य को भारत का प्रमुख ग्रामीण पर्यटन केंद्र (Rural Tourism Capital) बनाना है। इस योजना के जरिए ग्रामीण जीवनशैली, संस्कृति, परंपराएं और स्थानीय व्यंजन को वैश्विक स्तर पर पेश किया जाएगा।
क्या है योजना?
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ग्रामीण अनुभव पैकेज: गांवों में ठहरने, खेती-किसानी, लोक कला व हस्तशिल्प से जुड़े अनुभव पर्यटकों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
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होमस्टे और इको-फ्रेंडली पर्यटन: ग्रामीण इलाकों में होमस्टे नेटवर्क और पर्यावरण-हितैषी पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा।
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क्लस्टर मॉडल: चुनिंदा जिलों को पर्यटन क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां पर्यटक एक साथ कई गांवों का अनुभव कर सकेंगे।
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हस्तशिल्प और लोककला: बनारसी साड़ी, पीतल उद्योग, चिकनकारी और मिट्टी कला जैसी कारीगरी को पर्यटन से जोड़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों पर फोकस
पर्यटन विभाग ने बताया कि ग्रामीण पर्यटन केवल घरेलू पर्यटकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को भी आकर्षित किया जाएगा। इसके लिए विदेशी टूर ऑपरेटर्स के साथ साझेदारी की जाएगी और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट हब्स से गांवों तक बेहतर कनेक्टिविटी विकसित की जाएगी।
आर्थिक और सामाजिक लाभ
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ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को रोजगार मिलेगा।
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गांवों की बुनियादी सुविधाओं — सड़क, बिजली, इंटरनेट — का विकास होगा।
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स्थानीय उत्पादों और बाजार को नई पहचान मिलेगी।
सरकार की दृष्टि
पर्यटन मंत्री ने कहा:
“उत्तर प्रदेश के पास गांवों की संस्कृति, इतिहास और परंपराओं का अनूठा खजाना है। हमारा लक्ष्य ग्रामीण पर्यटन के जरिए ‘आत्मनिर्भर गांव’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को गति देना है।”
निष्कर्ष
ग्रामीण पर्यटन की यह पहल न केवल पर्यटकों को भारत की असली जड़ों से जोड़ने का अवसर देगी, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और समाज के लिए भी गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

