सलोनी तिवारी: उत्तर प्रदेश में तपती गर्मी और उमस ने बिजली खपत को रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा दिया है। राज्यभर में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे पावर मैनेजमेंट पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है।
UPPCL (उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड) का दावा है कि वर्तमान मांग अतिरिक्त रास्टरिंग (नियंत्रित कटौती) किए बिना पूरी की जा रही है। यानी, उत्पादन और सप्लाई के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए फिलहाल बड़े पैमाने पर बिजली कटौती नहीं करनी पड़ रही है।
फिर भी, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से लोडशेडिंग की शिकायतें लगातार आ रही हैं। कई जिलों के उपभोक्ता रोज़ाना कुछ घंटों की बिजली कटौती झेल रहे हैं, खासकर पीक ऑवर (शाम और रात) में।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में देरी और गर्म हवाओं के कारण बिजली खपत अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है। एसी, कूलर और पंखों की मांग ने ग्रिड पर दबाव बढ़ा दिया है।
अधिकारियों का कहना है:
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बिजली की आपूर्ति 27,000 मेगावाट से अधिक की जा रही है।
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मांग पूरी करने के लिए थर्मल और हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स की क्षमता का अधिकतम इस्तेमाल हो रहा है।
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उपभोक्ताओं से अपील है कि अनावश्यक उपकरणों का इस्तेमाल सीमित करें, ताकि संकट की नौबत न आए।
नतीजा:
यूपी में बिजली का संकट आधिकारिक तौर पर नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत यह बताती है कि कुछ जगहों पर उपभोक्ता अभी भी अघोषित कटौती से परेशान हैं। आने वाले दिनों में यदि बारिश होती है, तो खपत घट सकती है और लोगों को राहत मिल सकती है।

