राज्य फोरेंसिक लैब्स में 16,000+ मामलों की जांच, अपराध सुलझाने में तेजी

सलोनी तिवारी: उत्तर प्रदेश की फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (Forensic Labs) ने अपराध जांच में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2022 से अब तक 16,000 से अधिक मामलों की जांच पूरी की गई है, जिससे अपराध सुलझाने की प्रक्रिया को मजबूती मिली है।


नई पहलें और तकनीकी उन्नति

  • ड्रोन फॉरेंसिक लैब – लखनऊ में देश की पहली ड्रोन लैब शुरू की गई है, जो अपराध स्थलों का हाई-रेज़ोल्यूशन डेटा जुटाने में सक्षम है।

  • DNA लैब्स – अपराध जांच और पहचान के लिए DNA सैंपलिंग व विश्लेषण को तेज़ और सटीक बनाने हेतु नई DNA लैब्स की स्थापना।

  • 75 तकनीकी वैन – प्रदेशभर में मोबाइल तकनीकी फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे मौके पर ही सबूत इकट्ठा कर जांच शुरू की जा सके।


अपराध जांच पर असर

  • अपराधों को सुलझाने की गति और विश्वसनीयता में बड़ा सुधार हुआ है।

  • ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में भी तकनीकी जांच की सुविधा उपलब्ध।

  • कोर्ट में पेश होने वाले साक्ष्यों की विश्वसनीयता और मजबूती बढ़ी है।


सरकार और पुलिस की रणनीति

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डीजीपी कार्यालय ने फोरेंसिक जांच को अपराध नियंत्रण की रीढ़ बताया है। उनका कहना है कि नई तकनीक और लैब्स की मदद से अपराधियों को पकड़ना आसान होगा और न्याय प्रक्रिया तेज़ होगी।


निष्कर्ष:
उत्तर प्रदेश अब फोरेंसिक टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभर रहा है। ड्रोन लैब, DNA लैब और मोबाइल वैन जैसी पहलें आने वाले समय में अपराध जांच की तस्वीर बदल देंगी।

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