सलोनी तिवारी: उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को और तेज़ी देने तथा निवेशकों के लिए माहौल को और अनुकूल बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर औद्योगिक भूमि की उपलब्धता, मूल्य निर्धारण और निर्माण संबंधी नियमों में सुधार के लिए तीन उच्च-स्तरीय समितियों का गठन किया गया है।
सरकार के अनुसार, ये समितियाँ राज्यभर में लगभग 4 लाख हेक्टेयर औद्योगिक भूमि का रिव्यू करेंगी। उनका मुख्य कार्य यह होगा कि औद्योगिक भूमि के उपयोग को तर्कसंगत बनाया जाए, भूमि के दाम प्रतिस्पर्धी हों और बिल्डिंग बायलॉज़ (निर्माण नियम) निवेशकों के लिए सुलभ बनाए जाएं।
समितियों का उद्देश्य:
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भूमि उपलब्धता में तेजी: बड़ी और मध्यम औद्योगिक परियोजनाओं के लिए पर्याप्त भूमि सुनिश्चित करना।
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मूल्य नियंत्रण: भूमि दरों को निवेश-अनुकूल बनाना।
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बायलॉज़ में सुधार: निवेशकों और उद्योगपतियों के लिए जटिल नियमों को सरल करना।
औद्योगिक विकास का नया रोडमैप:
समितियाँ निवेशकों की ज़रूरतों और मौजूदा चुनौतियों पर आधारित रिपोर्ट तैयार करेंगी, जिसे आने वाले महीने में मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा। इसके आधार पर “इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2025” के संशोधित संस्करण को लागू किया जा सकता है।
सरकार का दावा है कि इन सुधारों से रोजगार सृजन में भारी बढ़ोतरी, विदेशी निवेश (FDI) में इज़ाफ़ा और क्षेत्रीय असंतुलन में कमी आएगी।
मुख्यमंत्री का बयान:
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के सपने को साकार किया जाए। इसके लिए हमें निवेशकों को विश्व-स्तरीय सुविधाएं और आसान प्रक्रियाएं देनी होंगी।”
निष्कर्ष:
यह पहल यूपी में औद्योगिक परिदृश्य को बदल सकती है। भूमि, नियम और कीमतों पर सरकार का यह केंद्रित ध्यान आने वाले वर्षों में राज्य को देश का सबसे बड़ा औद्योगिक हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

