सलोनी तिवारी: नई दिल्ली, 15 अगस्त 2025 — स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए पहली बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का ज़िक्र किया। उन्होंने RSS की सौ साल की सेवा यात्रा को देश के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कहा:
“आज मैं गर्व से कह सकता हूँ कि 100 साल पहले एक संगठन का जन्म हुआ — राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। सेवा, समर्पण और अनुशासन के साथ इसने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मैं इसे दुनिया का सबसे बड़ा NGO मानता हूँ।”
यह बयान मोदी के 12वें स्वतंत्रता दिवस भाषण में आया और इसे ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार उन्होंने RSS का नाम लेकर मंच से सराहना की।
ऐतिहासिक महत्व
RSS की स्थापना 1925 में हुई थी और पिछले एक सदी में इसने शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत, और सामाजिक उत्थान जैसे कई क्षेत्रों में कार्य किया है। प्रधानमंत्री का यह वक्तव्य न केवल संगठन की भूमिका को मान्यता देता है, बल्कि सेवा और एकता के संदेश को भी मजबूत करता है।
राष्ट्रीय संदेश
मोदी ने अपने संबोधन में युवाओं से भी अपील की कि वे राष्ट्र सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाएं और भारत को विश्व में अग्रणी बनाने के लिए योगदान दें। उन्होंने कहा कि “सेवा का मार्ग ही देश को प्रगति की ऊंचाइयों तक ले जाएगा।”
Anshika Media का दृष्टिकोण:
यह संबोधन केवल एक औपचारिक तारीफ नहीं, बल्कि सेवा और राष्ट्र निर्माण को सर्वोच्च मूल्य मानने का आह्वान है। स्वतंत्रता दिवस 2025 का यह क्षण आने वाले समय में एक ऐतिहासिक संदर्भ के रूप में देखा जाएगा।

