लखनऊ, 13 अगस्त 2025 – उत्तर प्रदेश विधानसभा ने बुधवार को ‘बांके बिहारी ट्रस्ट बिल 2025’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इस नए कानून के तहत वृंदावन स्थित प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर की संपत्ति, दान और चढ़ावे के प्रबंधन की जिम्मेदारी अब एक सरकारी ट्रस्ट के पास होगी।
क्या है बिल का उद्देश्य?
बिल का मुख्य उद्देश्य मंदिर के संसाधनों का पारदर्शी और सुव्यवस्थित संचालन सुनिश्चित करना है। सरकार का कहना है कि इस कानून से मंदिर की आय का सही इस्तेमाल होगा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं में सुधार आएगा।
ट्रस्ट का गठन
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ट्रस्ट का संचालन राज्य सरकार द्वारा नियुक्त सदस्य करेंगे।
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मंदिर की संपत्ति, दान और चढ़ावे के रख-रखाव और उपयोग पर ट्रस्ट का सीधा नियंत्रण होगा।
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आय-व्यय की नियमित ऑडिट रिपोर्ट भी जारी की जाएगी।
श्रद्धालुओं पर असर
इस फैसले से उम्मीद है कि:
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मंदिर में भीड़-भाड़ प्रबंधन बेहतर होगा,
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सफाई और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी,
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और दान राशि का अधिक हिस्सा धार्मिक व जन-सेवा कार्यों में खर्च होगा।
विवाद और प्रतिक्रिया
जहां सरकार इसे एक सकारात्मक कदम मान रही है, वहीं कुछ पारंपरिक पुजारी और स्थानीय लोग इसे मंदिर की स्वायत्तता में दखल मान रहे हैं। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के हित में है।
Anshika Media की राय:
धार्मिक स्थलों का प्रबंधन पारदर्शी होना जरूरी है, खासकर जब वहां सालाना करोड़ों रुपये का दान आता हो। यह बिल अगर सही तरीके से लागू हुआ, तो यह श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बना सकता है।

