बहुला चौथ 2025: संतान की सुख-समृद्धि और गौ पूजन का पर्व, जानें महत्व, पूजन विधि और व्रत नियम

नई दिल्ली, अगस्त 2025: हिंदू परंपरा में बहुला चौथ का विशेष महत्व है। यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इसे बहुला चतुर्थी या बोल चौथ भी कहा जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना करना है, साथ ही गाय की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता का सम्मान करना है।

बहुला चौथ की कथा

प्राचीन समय में एक गाँव में बहुला नाम की एक गाय रहती थी। वह बहुत ही सीधी-सादी, धर्मपरायण और अपने मालिक के प्रति निष्ठावान थी। एक दिन बहुला अपने बछड़े को घर में छोड़कर चरने के लिए जंगल गई। उसी दिन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी थी और वह उपवास पर थी।

जंगल में चरते समय एक बाघ ने उसका रास्ता रोक लिया। बाघ उसे मारकर खाने के लिए आगे बढ़ा, लेकिन बहुला ने हाथ जोड़कर कहा—
“आज बहुला चौथ का व्रत है, मैं अपने बछड़े को दूध पिलाकर ही इस संसार से जाऊंगी। आप मुझे जाने दीजिए, मैं वचन देती हूँ कि अपने बछड़े को दूध पिलाकर वापस लौट आऊंगी।”

बाघ को उसकी सच्चाई और धर्मनिष्ठा पर विश्वास हो गया। उसने बहुला को जाने दिया। बहुला घर पहुँची, अपने बछड़े को प्रेम से दूध पिलाया और फिर वचन निभाने के लिए वापस जंगल गई।

जैसे ही वह बाघ के पास पहुंची, बाघ ने उसे नहीं खाया। दरअसल, वह बाघ स्वयं भगवान श्रीकृष्ण थे, जिन्होंने बहुला की सत्यनिष्ठा और मातृत्व की परीक्षा ली थी। भगवान ने प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद दिया कि जो भी स्त्री इस दिन श्रद्धा से व्रत और गौपूजन करेगी, उसकी संतान सुखी, स्वस्थ और दीर्घायु होगी।

पर्व का महत्व:
गाय को हिंदू धर्म में ‘माता’ का दर्जा दिया गया है। बहुला चौथ पर गाय और बछड़े की पूजा कर भगवान श्रीकृष्ण और भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

पूजा विधि:

  • सुबह की तैयारी:

    • प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

    • दिनभर उपवास रखें।

  • सायंकालीन पूजन:

    • शाम को गाय और बछड़े का पूजन करें।

    • विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर पहले भगवान गणेश और श्रीकृष्ण को अर्पित करें।

    • इसके बाद ये व्यंजन गाय और बछड़े को खिलाएं।

  • कथा श्रवण:

    • पूजा के बाद चावल के दानों को दाहिने हाथ में लेकर बहुला चौथ की कथा सुनें।

    • गाय और बछड़े की परिक्रमा कर बच्चों की खुशी और सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें।

  • व्रत नियम:

    • इस दिन दूध से बनी चीज़ों का सेवन वर्जित है।

बहुला चौथ मंत्र:

“यः पालयन्त्यानाथांश्च परपुत्रान् स्वपुत्रवत्।
ता धन्यास्तः कृतार्थाश्च तास्त्रियो लोकमातरः॥”

यह मंत्र संतानों की रक्षा और गौमाता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए उच्चारित किया जाता है।

पर्व की विशेषताएं:

  • संबंधित नाम: बहुला चतुर्थी, बोल चौथ

  • तिथि: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी

  • पूजन हेतु देव: भगवान श्रीकृष्ण, भगवान गणेश, गौमाता

  • उत्सव: मंदिर में प्रार्थना, घर पर व्रत एवं पूजा

NOTE: ये पोस्ट धार्मिक मान्यताओं पर आधिरित है ये किसी भी दावे अथवा घटना की पुष्टि नहीं करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *