चित्रकूट (उत्तर प्रदेश): मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को चित्रकूट में आयोजित तुलसी जयंती समारोह में गोस्वामी तुलसीदास जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने मुग़ल सम्राट अकबर का दरबारी कवि बनना अस्वीकार कर अपना सम्पूर्ण जीवन प्रभु श्रीराम के चरणों में समर्पित कर दिया। उस दौर में जब अकबर के दरबार में नवरत्न बनने की होड़ मची थी, तब तुलसीदास जी ने रामभक्ति के पथ पर चलकर सनातन संस्कृति की रक्षा की।
मुख्यमंत्री ने चित्रकूट स्थित तुलसी मंदिर में तुलसीदास जी की हस्तलिखित रामचरितमानस के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने संत मोरारी बापू की रामकथा में शिरकत की, जहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने “जय श्रीराम” के जयघोषों से वातावरण को राममय कर दिया।
तुलसी प्रतिमा का अनावरण और वृक्षारोपण
इस अवसर पर सीएम योगी ने महाकवि तुलसीदास जी की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया और परिसर में वृक्षारोपण भी किया। उन्होंने कहा, “तुलसीदास जी की जीवनगाथा आज के समाज को धर्म, संस्कृति और सदाचार का मार्ग दिखाती है। उन्होंने गुलामी के कालखंड में रामभक्ति के माध्यम से एक सांस्कृतिक क्रांति को जन्म दिया।”
सीएम ने तुलसीदास के त्याग का उल्लेख करते हुए कहा, “रामबोला नाम के इस महापुरुष ने दरबारी बनने से इनकार कर दिया। जब राजे-रजवाड़े अकबर के दरबार में शामिल होकर दासता स्वीकार कर रहे थे, तब तुलसीदास जी ने स्पष्ट कहा कि मैं किसी विदेशी आक्रांता की शरण में नहीं जाऊंगा। मेरी वृत्ति प्रभु श्रीराम की सेवा है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि चित्रकूट की धरती को यह सौभाग्य प्राप्त है कि यहाँ श्रीराम ने अपने वनवास काल का अधिकांश समय बिताया। वाल्मीकि रामायण और गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस – दोनों रचनाओं का आधार यही भूमि रही है। यह स्थान सदियों से ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रहा है।
सीएम योगी ने अपने मॉरीशस दौरे का उल्लेख करते हुए बताया कि जब वे भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में वहाँ गए, तो वहाँ के गांवों में उन्हें चित्रकूट की झलक दिखी। उन्होंने कहा, “150 वर्ष पूर्व गुलामी के दौर में भी हमारे पूर्वज रामायण और भक्ति के माध्यम से अपने संस्कारों को जीवित रखे हुए थे।”
भारत की विरासत ही हमारा भविष्य
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथन को उद्धृत करते हुए कहा, “विकास विरासत पर आधारित होता है। हमें अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की रक्षा करनी चाहिए। कुछ लोग संतों को विवादों में घसीटने का प्रयास करते हैं, पर जिनका जीवन ही राममय है, वे इन षड्यंत्रों से विचलित नहीं होते।”

