श्रीहरिकोटा से सफल लॉन्च: नासा-इसरो का निसार सैटेलाइट अब रखेगा पूरी धरती पर नज़र!

सलोनी तिवारी: भारत और अमेरिका की स्पेस एजेंसियों—इसरो और नासा—ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। बुधवार शाम 5:40 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जीएसएलवी-एफ16 रॉकेट के जरिए निसार (NISAR – NASA ISRO Synthetic Aperture Radar) सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। यह सैटेलाइट सूर्य-समकालिक ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

क्या है निसार और क्यों है खास?

निसार सैटेलाइट दुनिया का पहला रडार सैटेलाइट है, जो दो बैंड (L-बैंड और S-बैंड) में काम करता है और पूरी पृथ्वी की निगरानी करने में सक्षम है। इसे नासा और इसरो ने मिलकर डिजाइन और विकसित किया है।
इसका उद्देश्य है धरती की भौगोलिक, पर्यावरणीय और मानवजनित गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखना, जिसमें भूकंप, ज्वालामुखी, ग्लेशियर पिघलना, खेती की स्थिति, जलवायु परिवर्तन और इंफ्रास्ट्रक्चर की निगरानी शामिल है।

 निसार के दो मुख्य बैंड:

  1. L-बैंड (1.25 GHz – 24 सेमी तरंगदैर्ध्य)

    • नासा द्वारा निर्मित

    • जमीन के नीचे तक की गतिविधियों की निगरानी

    • भूकंप, ज्वालामुखी, ग्लेशियर और भूस्खलन को ट्रैक करने में सक्षम

  2. S-बैंड (3.20 GHz – 9.3 सेमी तरंगदैर्ध्य)

    • इसरो द्वारा निर्मित

    • सतह की बारीक हलचलों, नमी, फसलें और संरचनात्मक निगरानी में सहायक

 निसार की तकनीक:

इस सैटेलाइट में Synthetic Aperture Radar (SAR) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक उच्च-रिज़ॉल्यूशन में चित्र लेती है, वह भी बादलों और अंधेरे के बीच। इस कारण, यह 24/7 पृथ्वी की निगरानी करने में सक्षम है।

प्रमुख आंकड़े:

  • वजन: 2.5 टन

  • ऊंचाई: पृथ्वी से 748 किमी ऊपर

  • स्कैन रेंज: एक बार में 240 किमी क्षेत्र

  • स्कैन चक्र: हर 12 दिन में पूरी पृथ्वी की स्कैनिंग

  • डेटा क्षमता: रोज़ाना 80 टेराबाइट

  • जीवनकाल: 3 साल

  • डेटा स्टोरेज: 150+ हार्डड्राइव भरने जितना डेटा

  • 102वां लॉन्‍च सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से

किसानों को क्या फायदा?

निसार सैटेलाइट खेती-किसानी के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है। यह फसलों की स्थिति, मिट्टी की नमी और जल प्रबंधन में वैज्ञानिक डाटा उपलब्ध कराएगा। इससे कृषि योजनाएं अधिक सटीक बन सकेंगी और किसानों को नुकसान से बचाया जा सकेगा।

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