सलोनी तिवारी: हरियाली तीज का पर्व सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति हेतु इस व्रत का पालन करती हैं।
इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा की जाती है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता पार्वती को भगवान शिव ने पत्नी रूप में स्वीकार किया था।
हिंदू पंचांग के अनुसार सावन शुक्ल तृतीया तिथि की शुरुआत:
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26 जुलाई, शनिवार रात 10:42 बजे से
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27 जुलाई, रविवार रात 10:41 बजे तक
उदय तिथि के अनुसार व्रत 27 जुलाई 2025, रविवार को रखा जाएगा।
हरियाली तीज के व्रत में महिलाएं रखें इन बातों का ध्यान
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हरे वस्त्र, हरी चूड़ियां और सोलह श्रृंगार धारण करें।
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माता पार्वती को भी सोलह श्रृंगार का अर्पण करें।
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उपवास रखने वाली महिलाएं पूर्ण निराहार रहें।
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काले रंग के वस्त्र और चूड़ियों से परहेज करें।
हरियाली तीज व्रत की संपूर्ण पूजा विधि
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प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
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पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
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लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर शिव-पार्वती की प्रतिमा (बालू की बनी हो तो श्रेष्ठ) स्थापित करें।
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दीप जलाकर व्रत का संकल्प लें।
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माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
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भगवान शिव का अभिषेक करें और व्रत कथा का पाठ करें।
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अंत में आरती करें और क्षमा याचना करें।
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अगले दिन प्रतिमा को किसी नदी या जल में विसर्जित करें।
Disclaimer: ये पोस्ट धार्मिक मान्यताओं पर आधिरित है ये किसी भी दावे अथवा घटना की पुष्टि नहीं करता है।

