सलोनी तिवारी: प्रयागराज, उत्तर प्रदेश – संगम नगरी प्रयागराज में स्थित लेटे हुए हनुमान जी का मंदिर आस्था, रहस्य और चमत्कार का अद्भुत संगम है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी संगम के पास स्थित यह मंदिर विश्व में अपनी तरह का एकमात्र स्थल है। यह मंदिर साल भर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहता है। खासकर कुंभ और माघ मेले के समय यहां भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है। यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक दृष्टिकोण से, बल्कि वास्तुशिल्प और लोकविश्वास की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
क्यों खास हैं लेटे हुए हनुमान जी?
मान्यता है कि जब भगवान राम ने लंका विजय के पश्चात् अयोध्या में राज्याभिषेक किया, तब हनुमान जी ने उनसे संगम तट पर विश्राम करने की आज्ञा ली। इसी स्थान पर हनुमान जी ने विश्राम किया और वे “लेटे हुए” स्वरूप में विराजमान हो गए। कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह स्वरूप भगवान राम की चरण वंदना की प्रतीकात्मक प्रस्तुति है।
गंगा जल का अद्भुत प्रभाव
हर साल जब गंगा का जलस्तर बढ़ता है और बाढ़ आती है, तब गंगा का पवित्र जल मंदिर में प्रवेश करता है और हनुमान जी की मूर्ति को स्नान कराता है। इसे प्रकृति द्वारा किया गया दिव्य अभिषेक माना जाता है। यह नज़ारा हजारों श्रद्धालुओं को चमत्कृत कर देता है।
भक्तों की भावना
भक्त कहते हैं:
“जहाँ पूरी दुनिया को गंगा में स्नान करना पड़ता है, वहाँ स्वयं गंगा माँ हनुमान जी को स्नान कराने आती हैं — यही तो है भक्ति की पराकाष्ठा।”
कुछ श्रद्धालु यह भी मानते हैं कि उस दिन जो भी हनुमान जी के जलमग्न स्वरूप के दर्शन करता है, उसके सारे पाप कट जाते हैं और वह जन्म-जन्मांतर के बंधनों से मुक्त हो जाता है।

