सलोनी तिवारी: ऋषीवाणी : अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (ISKCON) के संस्थापक-आचार्य ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद की कृपा से, शनिवार, 5 जुलाई को इस्कॉन कानपुर परिसर में दूसरी बार “किड्स जगन्नाथ रथ यात्रा” का भव्य आयोजन संपन्न हुआ।
यह आयोजन गोपाल्स फन स्कूल (इस्कॉन कानपुर का चिल्ड्रन्स विंग) द्वारा आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी को सनातन धर्म की परंपराओं, भक्ति और सेवा संस्कारों से जोड़ना था।
इस शुभ अवसर पर श्रीमान प्रेम हरिनाम प्रभुजी (अध्यक्ष, इस्कॉन कानपुर) की पावन उपस्थिति रही, जिन्होंने बच्चों को आशीर्वाद देते हुए कहा—“भगवान की सेवा में जब बालक भाग लेते हैं, तो यह उनके जीवन का सबसे पावन क्षण होता है। इससे उनके भीतर स्वाभाविक रूप से भक्ति और सेवा का भाव विकसित होता है।”
इस उत्सव में कानपुर के विभिन्न विद्यालयों और क्षेत्रों से सैकड़ों बच्चों ने भाग लिया। रथ सजाना, भोग बनाना, झांकियाँ तैयार करना और स्वागत नृत्य — इन सभी सेवाओं को बच्चों ने प्रेम और उत्साह के साथ स्वयं संपन्न किया।
रथ यात्रा की शुरुआत बच्चों के सुंदर भक्ति नृत्य से हुई और यात्रा भर हरिनाम संकीर्तन तथा नृत्य की गूंज से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा माता की झांकी से सजा रथ, बच्चों द्वारा श्रद्धा और आनंद के साथ खींचा गया।
यात्रा के मध्य अचानक वर्षा आरंभ हुई, परंतु यह किसी बाधा का कारण नहीं बनी — बल्कि बच्चों का उत्साह और भी बढ़ गया।
भीगते हुए नाचते बच्चों ने मानो भगवान की कृपा की वर्षा को हृदय से स्वीकार किया। यह केवल बारिश नहीं थी — यह प्रेम और कृपा की वर्षा थी।
अंत में समूह नृत्य के साथ भक्ति रस से परिपूर्ण इस आयोजन का समापन हुआ।
प्रसाद वितरण के साथ बच्चों ने न केवल प्रसाद का स्वाद लिया बल्कि संस्कारों और सेवा का अमृत भी पाया।
यह रथ यात्रा केवल एक आयोजन नहीं थी, यह एक पीढ़ी को कृष्णभावनामृत की ओर ले जाने वाली पावन यात्रा बन गई — जो बच्चों के नन्हे हृदयों में भक्ति, सेवा और भगवान के प्रति प्रेम का बीज बो गई।

