सलोनी तिवारी: कानपुर जनपद के भीतरगांव विकासखंड के गांव बेहटा में स्थित एक प्राचीन मंदिर वैज्ञानिकों और श्रद्धालुओं दोनों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है। करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित यह जगन्नाथ मंदिर अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए है। इसे “मानसून मंदिर” के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यह मंदिर मौसम की सटीक भविष्यवाणी करने की अद्भुत क्षमता रखता है।
उत्तर भारत में यह अपने प्रकार का एकमात्र जगन्नाथ मंदिर है, जहां पर हर वर्ष भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा अर्चना के लिए आते हैं। लेकिन इसकी प्रसिद्धि सिर्फ धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मंदिर मौसम वैज्ञानिकों के लिए भी शोध का विषय बन चुका है।
स्थानीय निवासियों और पुजारियों के अनुसार, जब भी बारिश आने वाली होती है, तो मंदिर की दीवारों पर नमी दिखाई देने लगती है। यह संकेत कभी भी गलत साबित नहीं होता। यही वजह है कि लोग इसे प्राकृतिक मौसम विज्ञान केंद्र की तरह मानते हैं। यहां तक कि मौसम विभाग के विशेषज्ञ भी इस मंदिर की शक्ति को लेकर आश्चर्य में रहते हैं और कई बार इसकी कार्यप्रणाली को समझने की कोशिश भी कर चुके हैं।
यह मंदिर सिर्फ एक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि प्रकृति और विज्ञान के रहस्यमय मिलन का प्रतीक बन चुका है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भले ही इसके रहस्य अब तक पूरी तरह उजागर नहीं हो सके हों, लेकिन गांव बेहटा का यह प्राचीन मंदिर हर मानसून में अपनी सटीक भविष्यवाणी से सभी को चौंकाता जरूर है।
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