सलोनी तिवारी: कानपुर। आज के दौर में जहां युवा करियर को लेकर असमंजस में रहते हैं और माता-पिता बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं, ऐसे समय में करियर काउन्सलिंग और मानसिक स्वास्थ्य मार्गदर्शन की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। अंशिका मीडिया की एडिटर ने इसी विषय पर एक विशेष इंटरव्यू किया प्रसिद्ध काउन्सलिंग साइकोलॉजिस्ट, करियर काउन्सलर और पेरेंटिंग कोच अर्चना राजीव गुप्ता से।
कौन हैं अर्चना राजीव गुप्ता?
अर्चना जी एक अनुभवी काउन्सलिंग साइकोलॉजिस्ट हैं, जो पिछले कई वर्षों से युवाओं को करियर मार्गदर्शन देने के साथ-साथ पेरेंटिंग और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी काम कर रही हैं। उन्होंने हजारों बच्चों और अभिभावकों को सही निर्णय लेने में मदद की है।
इंटरव्यू की प्रमुख बातें
🔹 अर्चना जी का मानना है कि बच्चे की रुचि और क्षमताओं को समझकर करियर का चयन करना बेहद ज़रूरी है।
🔹 करियर काउन्सलिंग कक्षा 10 के बाद से ही शुरू हो जानी चाहिए।
🔹 माता-पिता को बच्चों की भावनाओं और दबाव को समझना चाहिए, बजाय अपनी अपेक्षाएं थोपने के।
🔹 आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल उतनी ही ज़रूरी है जितनी शारीरिक स्वास्थ्य की।
माता-पिता के लिए संदेश
अर्चना जी ने विशेष रूप से माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों को सुनें, समझें और उन्हें खुलकर सोचने की आज़ादी दें। उन्होंने कहा, “हर बच्चा अलग होता है, और हर किसी की सफलता की परिभाषा भी अलग होती है।”
करियर काउन्सलिंग का भविष्य
उन्होंने यह भी बताया कि करियर काउन्सलिंग अब सिर्फ डॉक्टर-इंजीनियर तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब हज़ारों विकल्प मौजूद हैं—डिजिटल मार्केटिंग से लेकर एआई, फैशन डिजाइनिंग से लेकर फूड टेक्नोलॉजी तक।
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